Friday, July 17, 2015

vets' voice: पशुचिकित्सकों ने वरबैक कंपनी के बहिष्कार का लिया फैसला

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पशुचिकित्सकों ने वरबैक कंपनी के बहिष्कार का लिया फैसला

उत्तर प्रदेश के पशुचिकित्सकों ने पशु दवा कंपनी वरबैक के समस्त उत्पादों के बहिष्कार का फैसला लिया है. फाइट फार पैरिटी फोरम के समस्त जनपदों के सदस्यों ने व्यापक विचार विमर्श के बाद यह निर्णय लिया. यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू होगा. पिछले कई वर्षों से इस कंपनी के दवा प्रतिनिधियों द्वारा पंजीकृत पशुचिकित्साधिकारियों के प्रति अनुचित अहंकारपूर्ण व्यवहार की शिकायतों के बाद पशुचिकित्सकों ने यह निर्णय लिया है. कानपुर से डा एमपी राठौर, सहारनपुर से डा सुभाष मलिक, गोरखपुर से डा सुजीत सिंह, फैजाबाद से डा अनुज सिंह, इलाहाबाद से डा राजीव सिंह, फतेहपुर से डा अवनीश भट्ट, मऊ से डा अवनीश, डा सुनील, बस्ती से डा पीसीडी दि्वेदी, डा राजेश, झांसी से डा अवधेश निरंजन, बाराबंकी से डा राहुल, अमेठी से डा एसकेडी दि्वेदी, सुल्तानपुर से डा राजेश वर्मा आदि समन्वय बनाकर इस फैसले की लगातार निगरानी करेंगे. साथ ही इस कंपनी के बिना संघटन वाले समस्त उत्पादों की जांच के लिए भी विचार किया जा रहा है. कंपनी द्वारा कुत्सित उद्देश्यों के साथ पशुचिकित्सा तकनीकी विवरण यथा- हार्मोन, झोलाछापों को बताने पर गंभीर चिंता जताई गई जिससे एंटीबायोटिक रजिस्टेंस, बांझपन, गर्भपात आदि समस्याओं के कारण पशुपालकों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है.

Saturday, March 21, 2015

उत्तर प्रदेश में पशुपालन - दशा दिशा

उत्तर प्रदेश में प्रतिव्यक्ति दुग्ध उपलब्धता 309 ग्राम हो गई है, जो कि राष्ट्रीय औसत (252 ग्राम) एवं वैश्विक औसत (279 ग्राम) से ज्यादा है, हालांकि देश में पंजाब ( 937 ग्राम) में सर्वाधिक प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता है, जो कि 9.2 मी.टन के साथ 8 प्रतिशत योगदान करता है जबकि उत्तर प्रदेश (17 प्रतिशत) का योगदान सर्वाधिक है जिसके बाद राजस्थान (11 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (9 प्रतिशत), गुजरात (8 प्रतिशत) का योगदान है. यह पांच सर्वोच्च योगदान वाले राज्य, देश के दुग्ध उत्पादन (121 मी.टन) का कुल 53 प्रतिशत दूध का उत्पादन करते हैं. 2006-07 से 2010 -11 के बीच राष्ट्रीय वृद्धि दर 19 प्रतिशत की तुलना में पंजाब में 3 प्रतिशत की दर रही है, जबकि आंध्र प्रदेश में 41, राजस्थान में 28, केरल मेंं 24.8, कर्नाटक में 24 प्रतिशत वृद्धि दर रही है. वैश्विक स्तर पर प्रतिव्यक्ति दूध उपलब्धता में न्यूजीलैंड (9773), आयरलैंड (3260), डेनमार्क (2411) अग्रणी तीन राष्ट्र हैं. 22.3.2015

Friday, March 20, 2015

उत्तर प्रदेश में पशुपालन की दशा - दिशा

उत्तर प्रदेश में 19.96 करोड़ जनसंख्या का 72.20 प्रतिशत कृषि एवं पशुपालन पर निर्भर है. 822 विकासखंडों के 97941 आबाद ग्रामों वाले प्रदेश के पशुपालक दूध की कम कीमत एवं भूसे की किल्लत एवं ऊंचे दाम से परेशान हैं. साथ ही पशुपालक पशुचिकित्सकों की अपर्याप्त संख्या के कारण झोलाछापों द्वारा छले जा रहे हैं. प्रत्येक 5000 बड़े पशु संख्या पर एक पशुचिकित्सालय के मानक विपरीत वर्तमान में प्रति पशुचिकित्सक 20000 पशुओं का अनुपात है जिससे पशुचिकित्सा अधिकारियों पर तीन गुना अधिक कार्य का दबाव है. 6.93 करोड़ पशुधन (श्वान सहित) एवं  1.78 करोड़ कुक्कुट के स्वास्थ्य सुश्रुषा के लिए कुल 2200 पशुचिकित्सालय हैं. प्रदेश में कुल 1.90  करोड़ गोवंशी एवं 2.64 करोड़ महिष वंशी पशु, 19.87 लाख सूकर, 1.48 करोड़ बकरी, 14 लाख भेड़, 98 हजार घोड़े-टट्टू, 76 हजार गधे, 30 हजार खच्चर, 8000 ऊंट हैं.