Tuesday, June 2, 2009

पशुचिकित्सकों की रोग संचरण में भूमिका

पशुओं के सबसे निकट पशुपालक एवं पशुचिकित्सक रहते हैं जिस कारण से पशुओं से मानव में रोग संचरण में इनकी भूमिका अति महत्वपूर्ण होती है। अमेरिका से प्रकाशित एक शोधपत्र में पशुचिकित्सकों की भूमिका पर व्यापक अध्ययन किया गया है। वास्तव में पशुचिकित्सक का संपर्क गाँव से शहर तक अत्यधिक व्यापक होता है, आमतौर पर पशुओं की चिकित्सा के बाद पशुचिकित्सक अपने शारीरिक अंगो की सफाई कर लेते हैं परन्तु जूतों, वस्त्रों, वाहन आदि के प्रति उतने जागरुक नही होते हैं जिस कारण से कार्य निवृत्ति के पश्चात संपर्क में आने वाली मानव जनसँख्या में पशुजनित रोग फैलाने की संभावना भी ज्यादा होती है। इसप्रकार मानवों के लिए पशुचिकित्सक एक पुल रुपी जनसँख्या का कार्य करते है। लगभग १४०० मानव रोग पशुजनित होते हैं। १७७ पुनः उद्भावी रोगों में से ७७ प्रतिशत रोग की पशुओं से होती है। अतः सरकारों को पशुचिकित्सकों के स्वस्थ्य एवं कार्य स्थिति के प्रति सहानुभूति पूर्वक विचार करके सुविधाओं को बढाना चाहिए। जैविक रोगों के प्रति तय्यारी में पशुचिकित्सक जीवनदायी भूमिका निभाते हैं परन्तु उनके योगदान को समाज में समुचित महत्व नहीं मिलता है।