Friday, April 18, 2008
role of vets in nation building
राष्ट्र निर्माण में पशु चिकित्सकों के महत्व पूर्ण योगदान की हमेशा उपेक्षा की गई है जिस कारण पशु चिकित्सकों के कल्याण की तरफ़ सरकारें भी पूरा ध्यान नही देती हैं और उनकी आवश्यकताओं एवं भूमिका को पुनः परिभाषित कराने की जरुरत है। समस्त पाठकों विशेषकर पशुचिकित्सकों से अनुरोध है कि अपनी सेवा एवं उपलब्धि द्वारा सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं के निराकरण की तरफ़ खींचा जाए। वर्तमान में पशुचिकित्सक की पहुँच उन दुर्गम अविकसित ग्रामीण क्षेत्र में भी है जहाँ आमतौर पर कोई अधिकारी जाना भी नहीं चाहता है। इस प्रकार पशुचिकित्सकों की पहुँच का लाभ ग्रामीण जनता एवं पशुओं को मिलता है। यह पशुचिकित्सकों का योगदान है कि दुग्ध एवं अण्डों के उत्पादन में भारत की विश्व में ख़ास पहचान है। सरकार को चाहिए कि इन पशुचिकित्सकों की समस्याओं पर तुरंत विचार करे तथा उचित निश्तारण करे। पशुचिकित्सा के क्षेत्र में shodh एवं प्रसार को बढावा देने के लिए पशु विज्ञान एवं प्रसार केन्द्रों की स्थापना ब्लाक स्तर पर की जाए। जिसमें स्थानीय पशुधन की रोग्प्रतिरोधक क्षमता एवं अन्य विशेषताओं को संरक्षित किया जाए और उनकी उत्पादकता को धीरे धीरे बढाया जाए। यह बड़े क्षोभ का विषय है की इतने विशाल देश में पशुचिकित्सा शोध के लिए एकमात्र संस्थान इज्जतनगर बरेली में है। कुत्तो एवं अन्य विडाल प्रजातियों पर कोई भी शोध एवं विकास संस्थान भारत में नहीं है। पशु धन प्रसार, चिकित्सा एवं शिक्षण का कार्य के लिए अलग स्तर पर कर्मचारी एवं विभाग राज्य एवं केन्द्र स्तर पर नही है। टीकाकरण कार्यक्रम की हालत और ख़राब है। एक तरफ़ पुलसे पोलियो अभियान पूरे साल भर सभी विभागों की सहायता लेकर चलाया जाता है वहीं पशुओं में टीकाकरण को उपेक्षित कर दिया जाता है। अधिकतर राज्यों में पशुचिकित्सकों की भारी कमी के कारण रोग प्रतिरक्षण एवं गर्भादान कार्यक्रम की प्रगति अत्यंत धीमी है। हर वर्ष हज़ारों पशु एवं kukkut बिना इलाज के मर jaatein hain। पशुधन के विकास एवं sanrakshan के लिए nitiyan pashupaalkon एवं पशुचिकित्सकों द्वारा miljul कर banai जानी चाहिए.
Subscribe to:
Posts (Atom)