Friday, November 7, 2008
रोग नियंत्रण
भारत में पशुओं में रोग नियंत्रण के लिए कोई अलग तंत्र नहीं होने से एक पशु चिकित्सक को सारे कार्य करने पड़ते हैं। टीकाकरण, प्रजनन, प्रसार, रोग उपचार आदि के लिए एक ही पशुचिकित्सक उत्तरदायी होता है। सरकारी उदासीनता की वजह से गावों में तथाकथित फर्जी पशुचिकित्सक पशुओं को उल्टे सीधे इलाज़ द्वारा मारते हुए मिल जायेंगे। ऐसे व्यक्ति एंटीबायोटिक द्वारा ही हर रोग का इलाज़ करते रहते हैं। सरकार का कोई भी नियंत्रण ऐसे प्रकरणों पर नही होता है। कुछ राज्यों में तो सरकार ही पैरावेट के रूप में इन व्यक्तिओं को वैधानिकता प्रदान कर रही है। आवश्यकता इस बात की है की पैरावेट को बढ़ावा देने के बजाये सुप्रशिच्छित उपाधिधारी पशुचिकित्सकों की और अधिक संख्या में नियुक्त करे तथा फर्जी डॉक्टरों पर कड़ी कार्यवाही करे।
Thursday, June 26, 2008
पशुचिकित्सकों के समक्ष चुनौतियां
देश में पशुओं की ख़राब हालत के लिए हम सब जिम्मेदार हैं। हम सब मिलकर
प्रयास करने के बजाय एक दूसरे पर दोषारोपण करते रहते हैं। कुछ सरकारी नीतियाँ जिम्मेदार हैं कुछ जनता जिम्मेदार है। पैरावेट जैसे ही हजारों लोगों को सरकार ने जानवरों की जान से खेलने का लाईसेन्स दे दिया है। पैरावेट पशुओं की सेवा के लिए रखे गए हैं परन्तु इस समय इनका काम पशुचिकित्सको की बुराई करके अपना उल्लू सीधा करना रह गया है। जो इलाज दस रुपये में हो सकता है उसे पैरावेट इतना खतरनाक बना देते हैं कि उसे हजारों रुपये खर्च करने पर भी ठीक नही किया जा सकता है जैसे थनैला रोग, गला घोंटू, एफेमेरल फीवर । पशुचिकित्सको की भरती के बिना पशुओं की हालत सुधरने की आशा करना बेकार है। इसके साथ ही जो स्नातक उच्च शिक्षा प्राप्त किए हैं उनको उचित सुविधाएं देकर उनकी शिक्षा एवं योग्यता का पूरा लाभ उठाना चाहिए। परन्तु दुर्भाग्य है कि भारत के अधिकतर राज्यों में ऐसा नही है।
प्रयास करने के बजाय एक दूसरे पर दोषारोपण करते रहते हैं। कुछ सरकारी नीतियाँ जिम्मेदार हैं कुछ जनता जिम्मेदार है। पैरावेट जैसे ही हजारों लोगों को सरकार ने जानवरों की जान से खेलने का लाईसेन्स दे दिया है। पैरावेट पशुओं की सेवा के लिए रखे गए हैं परन्तु इस समय इनका काम पशुचिकित्सको की बुराई करके अपना उल्लू सीधा करना रह गया है। जो इलाज दस रुपये में हो सकता है उसे पैरावेट इतना खतरनाक बना देते हैं कि उसे हजारों रुपये खर्च करने पर भी ठीक नही किया जा सकता है जैसे थनैला रोग, गला घोंटू, एफेमेरल फीवर । पशुचिकित्सको की भरती के बिना पशुओं की हालत सुधरने की आशा करना बेकार है। इसके साथ ही जो स्नातक उच्च शिक्षा प्राप्त किए हैं उनको उचित सुविधाएं देकर उनकी शिक्षा एवं योग्यता का पूरा लाभ उठाना चाहिए। परन्तु दुर्भाग्य है कि भारत के अधिकतर राज्यों में ऐसा नही है।
Friday, April 18, 2008
role of vets in nation building
राष्ट्र निर्माण में पशु चिकित्सकों के महत्व पूर्ण योगदान की हमेशा उपेक्षा की गई है जिस कारण पशु चिकित्सकों के कल्याण की तरफ़ सरकारें भी पूरा ध्यान नही देती हैं और उनकी आवश्यकताओं एवं भूमिका को पुनः परिभाषित कराने की जरुरत है। समस्त पाठकों विशेषकर पशुचिकित्सकों से अनुरोध है कि अपनी सेवा एवं उपलब्धि द्वारा सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं के निराकरण की तरफ़ खींचा जाए। वर्तमान में पशुचिकित्सक की पहुँच उन दुर्गम अविकसित ग्रामीण क्षेत्र में भी है जहाँ आमतौर पर कोई अधिकारी जाना भी नहीं चाहता है। इस प्रकार पशुचिकित्सकों की पहुँच का लाभ ग्रामीण जनता एवं पशुओं को मिलता है। यह पशुचिकित्सकों का योगदान है कि दुग्ध एवं अण्डों के उत्पादन में भारत की विश्व में ख़ास पहचान है। सरकार को चाहिए कि इन पशुचिकित्सकों की समस्याओं पर तुरंत विचार करे तथा उचित निश्तारण करे। पशुचिकित्सा के क्षेत्र में shodh एवं प्रसार को बढावा देने के लिए पशु विज्ञान एवं प्रसार केन्द्रों की स्थापना ब्लाक स्तर पर की जाए। जिसमें स्थानीय पशुधन की रोग्प्रतिरोधक क्षमता एवं अन्य विशेषताओं को संरक्षित किया जाए और उनकी उत्पादकता को धीरे धीरे बढाया जाए। यह बड़े क्षोभ का विषय है की इतने विशाल देश में पशुचिकित्सा शोध के लिए एकमात्र संस्थान इज्जतनगर बरेली में है। कुत्तो एवं अन्य विडाल प्रजातियों पर कोई भी शोध एवं विकास संस्थान भारत में नहीं है। पशु धन प्रसार, चिकित्सा एवं शिक्षण का कार्य के लिए अलग स्तर पर कर्मचारी एवं विभाग राज्य एवं केन्द्र स्तर पर नही है। टीकाकरण कार्यक्रम की हालत और ख़राब है। एक तरफ़ पुलसे पोलियो अभियान पूरे साल भर सभी विभागों की सहायता लेकर चलाया जाता है वहीं पशुओं में टीकाकरण को उपेक्षित कर दिया जाता है। अधिकतर राज्यों में पशुचिकित्सकों की भारी कमी के कारण रोग प्रतिरक्षण एवं गर्भादान कार्यक्रम की प्रगति अत्यंत धीमी है। हर वर्ष हज़ारों पशु एवं kukkut बिना इलाज के मर jaatein hain। पशुधन के विकास एवं sanrakshan के लिए nitiyan pashupaalkon एवं पशुचिकित्सकों द्वारा miljul कर banai जानी चाहिए.
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