Friday, November 7, 2008
रोग नियंत्रण
भारत में पशुओं में रोग नियंत्रण के लिए कोई अलग तंत्र नहीं होने से एक पशु चिकित्सक को सारे कार्य करने पड़ते हैं। टीकाकरण, प्रजनन, प्रसार, रोग उपचार आदि के लिए एक ही पशुचिकित्सक उत्तरदायी होता है। सरकारी उदासीनता की वजह से गावों में तथाकथित फर्जी पशुचिकित्सक पशुओं को उल्टे सीधे इलाज़ द्वारा मारते हुए मिल जायेंगे। ऐसे व्यक्ति एंटीबायोटिक द्वारा ही हर रोग का इलाज़ करते रहते हैं। सरकार का कोई भी नियंत्रण ऐसे प्रकरणों पर नही होता है। कुछ राज्यों में तो सरकार ही पैरावेट के रूप में इन व्यक्तिओं को वैधानिकता प्रदान कर रही है। आवश्यकता इस बात की है की पैरावेट को बढ़ावा देने के बजाये सुप्रशिच्छित उपाधिधारी पशुचिकित्सकों की और अधिक संख्या में नियुक्त करे तथा फर्जी डॉक्टरों पर कड़ी कार्यवाही करे।
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